यूपी के गांवों में दिल के मरीजों के लिए बड़ी राहत, अब PHC-CHC पर मिलेगा हार्ट अटैक का शुरुआती इलाज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हृदय रोगियों के लिए राहत की खबर है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हार्ट अटैक की आशंका वाले मरीजों को शुरुआती उपचार मिल सकेगा। इसके लिए 75 जिलों के 464 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार ने जिला अस्पतालों में हृदय रोग की विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने और मरीजों को गोल्डन आवर में उपचार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।

464 स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिला अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों और निदेशकों से स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अस्पतालों में चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने और रात में नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हृदय रोग की त्वरित चिकित्सा के लिए प्रथम चरण में 75 जिलों के 464 सहायक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। सभी जिला अस्पतालों में हृदय रोग से संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

2.54 लाख से ज्यादा मरीजों की हुई ईसीजी

अगस्त तक 2,54,384 संभावित हृदय रोगियों की ईसीजी की जा चुकी है। इनमें 3,631 मरीजों में एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी एसटीईएमआई की पहचान हुई।

इनमें से 2,179 मरीजों को थ्रोम्बोलिसिस यानी खून के थक्के को तोड़ने की प्रक्रिया के जरिए प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें हृदय रोग विशेषज्ञ केंद्रों पर भेजा गया। अधिकारियों को गोल्डन आवर के दौरान मिलने वाले उपचार की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

डायलिसिस के लिए बढ़ाई जाएंगी बेड की संख्या

राज्य में गुर्दे के मरीजों की बढ़ती संख्या और डायलिसिस यूनिटों में लंबी प्रतीक्षा सूची को देखते हुए जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन जिला अस्पतालों में पहले से डायलिसिस की सुविधा मौजूद है, वहां बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी। वहीं, जिन अस्पतालों में यह सुविधा नहीं है, वहां डायलिसिस यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

जिन अस्पतालों की ओर से इसके लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं, उनका परीक्षण कर तेजी से कार्रवाई करने को कहा गया है।

अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी पर सख्ती

अपर मुख्य सचिव ने अस्पतालों में चिकित्सकों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ रात के समय नियमित राउंड कराने के निर्देश दिए। वरिष्ठ अधिकारियों को मरीजों को मिल रही सेवाओं, कर्मचारियों की उपस्थिति और अस्पताल की व्यवस्थाओं का प्रभावी निरीक्षण करने को कहा गया है।

फायर सेफ्टी से लेकर डेंगू-मलेरिया तक तैयारी के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थापना जल्द पूरी करने और लंबित फायर एनओसी का तत्काल निस्तारण कराने को कहा है। अग्निशमन विभाग के साथ समन्वय कर मॉक ड्रिल कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और स्वच्छता गतिविधियों में तेजी लाने को कहा गया है। डेंगू और मलेरिया की संभावित स्थिति को देखते हुए अस्पतालों में दवाएं, ऑक्सीजन, एंबुलेंस, लॉजिस्टिक्स और अतिरिक्त बेड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिफ्रेशर प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया है।

 

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